प्रस्तावित योजनाएं

बाउंड्रीवाल का निर्माण-


नई जमीन के लिए सर्वें का काम पूरा हो चुका है। करीब……  बीघा जमीन के आवंटन का काम चल रहा है। इसके होते ही पुरानी गौ शाला में रह रहे गौ वंश को घूमने के लिए उचित जमीन मिलेगी और शहर में घूम रहे गौ वंश को हटाने में मदद मिलेगी। जिससे शहर में सड़क दुर्घनाओं को रोका जा सकेगा। इसके लिए आवंटित भूमि के चारों ओर बाउंड्री निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।

गौ ग्रास. के लिए घर घर रिक्शा भेजकर अनाज आदि का कलेक्शन किया जा सकता है। लुधियाना की तर्ज पर इसके लिए कुछ विशेष कॉलोनियों का चयन प्रथम चरण में किया जाएगा। इसके बाद दूसरी कॉलोनी और मोहल्लों तक गौ ग्रास के लिए रिक्शा वाहन पहुंचेगे। जिसे शहर का हर घर अप्रत्यक्ष रूप से गौ शाला से जुड़ जाएगा।

अनुसंधान-


गौ शाला का विस्तार होने और बड़ी संख्या में गौ वंश के उपलब्ध होने से यह गायों पर शोध करने का उचित स्थान बन गया है। भविष्य में यहां पशु चिकित्सक व अन्य शोधार्थियों के लिए अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाना है। ताकि गौ मूत्र, गोबर, खाद, दूध, आदि पदार्थों पर शोध कर गौ वंश के नस्ल सुधार में वैज्ञानिक परिणाम सामने आ सकें। और देशी गौ वंश को संरक्षित किया जा सके।

 

गौ भोग के लिए विशेष खनौटों का निर्माण-


6 हजार गौ वंश के प्रत्येक ब्लॉक में प्रत्येक गाय और नंदी तक लोग आसानी से पहुंचकर गौ भोग लगा सकें। इसके लिए विशेष प्रकार के खनोटों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है ताकि बच्चों तक को कोई डर न लगे। और वह आसानी से चारा आदि अपने हाथों से खिला सकें।

 

भव्य मंदिर और पार्क का निर्माण-


भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसलिए गौ शाला परिसर में जनभागीदारी से भव्य मंदिर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। मंदिर के आस पास पार्क का निर्माण भी योजना में शामिल है। जहां शहर के लोग परिवार सहित आध्यामिक शांति और भ्रमण का अनुभव कर सकें।

 

नाम पट्टिकाएं-


गौशाला में निर्माण कार्यों में सहयोग करने वाले अपने पूर्वजों की याद में निर्माण कार्य करा सकते हैं। इसके लिए वह नाम पट्किाएं भी लगवा सकते हैं।

 

गौ वंश को गोद लेना-


यहां प्रति गाय पर करीब 110 से 125 रुपए का व्यय प्रतिदिन होता है। जिसमें दवाएं आदि भी शामिल हैं। कोई व्यक्ति एक या उससे अधिक गायों को गोद ले सकता है। इसके साथ ही कोई संस्था या समाज गायों की संख्या या पूरे एक ब्लॉक को गोद ले सकती है। इसके लिए संस्था या समाज का बोर्ड उक्त ब्लॉक पर लगाया जा सकेगा। वह उक्त राशि निगम के खाते में जमा करा सकते हें। इसके बाद गायों की समय समय पर वह निगरानी भी कर सकते हैं। इसके लिए आधुनिक और पारदर्शी सिस्टम भी विकसित किया जाना प्रस्तावित है। जिसमें लोग मोबाइल पर ही गौ वंश को लाइव देख सकेंगे और जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

 

बेरोजगारों के लिए योजनाएं-


गौ शाला में गोबर से बनने वाली खादए कंडे, गमले, मूर्तियां, अगर बत्तियांए धूप बत्तियां एवं गौ मूत्र से बनने वाले उत्पादों के लिए बेरोजगारों और अनुभवि लोगों से प्रस्ताव आमंत्रित हैं। इसमें लाभ का 50 प्रतिशत गौ शाला को देकर शहर के युवा खुद का रोजगार कर सकते हें।

दान पेटियां-


शहर की दुकानों और व्यावसायिक संस्थानों में गौ शाला की नंबर युक्त दानपेटियां रखवाई जा सकती हैं। जहां लोग खरीदारी के समय ही दान कर सकते हैं। इन पेटियों से संतों की निगरानी में निगम अफसर राशि का कलेक्शन कर सकते हैं।

प्रचार प्रसार-


देश की सबसे बड़ी गौ शला जो निगम द्वारा संचालित है। यह ग्वालियर का गौरव हे जो गौ धाम बनने जा रहा है। इसके लिए शहर के एंट्री पॉइंट के साथ ही प्रमुख स्थानों पर बड़े आकार के होडिं़्ग लगाए जाने हैं। लोगों को जागरुक करने के लिए

आधुनिक शेड का निर्माण-


कम कर्मचारी कम समय में अधिक से अधिक गौ वंश तक चारा आदि पहुंचा सकें इसके लिए विशेष प्रकार के शेड और खनोंटों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही गौ मूत्र के कलेक्शन के लिए नालियों युक्त चेंबरों का भी निर्माण भी किया जा रहा है।

गौ दान-


गो दान और ग्रह प्रवेश के लिए गौ शाला से गायों को पूजन कार्य के लिए घर तक भेजा जाएगा। इसके लिए लोग गौ शाला में रसीद कटा सकते हैं। यह गाय वापस गौ शाला आ जाएंगी। इसमें कुछ हिस्सा पंडितों के लिए तय किया जा सकता है। इसके लिए शहर के सभी कथावाचक, पंडित और ज्योतिष का कार्य कर रहे लोगों की अलग से बैठक कर गौ शाला और गौ वंश के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

किसानों को प्रेरित-


जिले के किसानों को गौ आधारित खेती ऑगेज़्निक खेती के लिए प्रेरित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए छोटे और बड़े किसानों की बैठक गौ शाला में की जा सकती है। गौ शाला से उन्हेंं खाद बनाकर सस्ते दामों में मुहैया कराया जाएगा। जिससे किसानों का यूरीया आदि खाद का विकल्प मुहैया कराया जाएगा।

सीए जोडऩा-


सीए चाहें तो व्यापारियों को निगम की गौशाला के लिए दान कराने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसके लिए इनकम टैक्स में छूट भी मिलेगी, शहर के सभी सीए के साथ अलग से बैठक कर सकते हैं।

नाम पटिटका-


गौ शाला का आधुनिक नक्शा बनाया जाए। इसके बाद लोगों से उनके पूर्वजों की याद में निर्माण कार्य के लिए हिस्सेदारी तय की जा सकती है।

निगरानी-


गौ शाला के विस्तार के साथ ही निगरानी व्यवस्था के लिए करीब 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है।

नंदी निदान-


जिन जिलों में बैल आधारित खेती हो रही है। वहां गौ शाला से बैल तैयार कर भेजे जा सकते हैं। इससे न केवल गौ शाला का नाम दूसरे जिलों में पहुंचेगा। वरन गौ शाला का भार भी कम होगा और किसानों को भी लाभ होगा

गोकुल धाम-


नई टाउनशिप में रहने वालों के लिए उसी कॉलोनी में गौ आधारित डेयरी फ ार्म खोले जाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। ताकि लोगों को ताजा और शुद्ध देशी गाय का दूध मिल सके। यह नई शुरुआत मध्य प्रदेश में हो सकती है। इसके लिए बिल्डर्स से चर्चा जारी है।

जागरुकता अभियान-


देशी गाय का दूध अमृत है लेकिन लोगों ने गाय के दूध की कीमत भेंस और जसीज़् गाय के दूध से करनी शुरू कर दी। चूंकि देशी गाय दूध कम देती है। वह रोगों से लडऩे के लिए शक्ति प्रदान करता है। जबकि जसीज़्ए फ्रिजन गाय के दूध में ऐसा कोई गुण नहीं होता। लेकिन जानकारी के अभाव में अमृत की जगह जहरीले दूध का सेवन कर रहे हैं। इसीलिए गौ वंश रोड पर आ रहा है। अगर देशी गाय का दूध 70 से 80 रुपए किलो भी मिले तो उसे खरीदकर गौ वंश और देशी गौ पालन को बचाया जा सकता है। यह राशि आने वाले कैंसर एवं अन्य रोगों की तुलना में देखी जाए तो बहुत कम है। जिस पर लोगों को विचार करने की जरूरत है।